भारत की राष्ट्रभाषा क्या है और कौनसी होनी चाहिए~ 2021

इस पोस्ट में हम संविधान के अनुसार भारत की राष्ट्रभाषा क्या है और भारत की राष्ट्रभाषा कौनसी होनी चाहिए के विषय पर पूरी विस्तार से जानकारी देने वाले है।

दोस्तों हर देश में अलग-अलग भाषा बोली जाती है और बहुत से देशो में अंग्रेजी भाषा का बहुत दबदबा है और हमारे देश में भी चूकी अंग्रजो का शासन रह चूका है तो यहाँ भी अंग्रेजी भाषा को बहुत महत्त्व देते है लेकिन बहुत से लोग हिंदी को भारत की राष्टभाषा मानते है और शायद आप भी यही मानते होंगे?

भारत की राष्ट्रभाषा को लेकर इतिहास में बहुत से विवाद हुए है और बहुत से लोग संस्कृत को भारत की राष्ट्रीय भाषा मानते है तो बहुत से लोग हिंदी भाषा को भारत की राष्ट्रभाषा मानते है लेकिन क्या असल में हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है और अगर नहीं है तो हमारी राष्ट्रीय भाषा क्या है?

तो अगर आप भी जानना चाहते है की आखिर संविधान के अनुसार भारत की राष्ट्रीय भाषा कौन सी है तो कृपया इस पोस्ट को शुरू से अंत तक ध्यानपूर्वक पूरा पढ़े।

भारत की राष्ट्रभाषा क्या है (नेशनल लैंग्वेज ऑफ़ इंडिया)

अगर बात करे भारत की राष्ट्रीय भाषा क्या है तो आपको बता दे भारतीय संविधान में राष्ट्रीय भाषा का कोई उल्लेख नहीं किया गया है यानि की भारत में किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया है।

जहा तक बात की जाए संविधान के किस भाग के अनुसार हिंदी राजभाषा है तो आपको बता दे भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 के अंतर्गत हिंदी भाषा को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया गया है यानि की हिंदी भाषा का इस्तेमाल राजकीय कार्यो में किया जा सकता है।

भारत सरकार द्वारा 22 भाषाओ को आधिकारिक तौर पर चुना गया है यानि की राज्य सरकार और केंद्र सरकार इन 22 भाषाओ में से किसी भी भाषा का इस्तेमाल सरकारी काम काजो में कर सकते है।

केंद्र सरकार के सभी कार्यो में आपको हिंदी और इंग्लिश भाषा का प्रयोग देखने को मिल सकता है क्योकि केंद्र सरकार द्वारा हिंदी और इंग्लिश भाषा को आधिकारिक कामो के लिए चुना गया है।

राष्ट्रभाषा और राजभाषा में क्या अंतर है

चूकी हमने बताया की हिंदी राष्ट्र भाषा नहीं बल्कि राजभाषा है और बहुत से लोगो को यह Doubts होगा की आखिर राष्ट्रभाषा और राजभाषा में क्या अंतर है तो चलिए जानते है इनके बीच के अंतर को।

क्र.स.राष्ट्रभाषा राजभाषा
1 राष्ट्रभाषा स्वतंत्र प्रकृति की होती है। जबकि राजभाषा नियमो से बंधी होती है।
2 राष्ट्रभाषा का क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक होता है। जबकि राजभाषा का प्रयोग निश्चित भूभाग तक सिमित होता है।
3 राष्ट्रीय भाषा जनता की भाषा होती है। जबकि राजभाषा राज काम काज की भाषा है।
4 राष्ट्रभाषा की शब्दावली विस्तृत होती है। जबकि राजभाषा की सीमित होती है।
5 राष्ट्रभाषा में समस्त राष्ट्रीय तत्वों की अभिव्यक्ति होती है। जबकि राजभाषा में केवल प्रशासनिक अभिव्यक्ति होती है।

तो इस प्रकार दोस्तों अब आपको राष्ट्रीयभाषा और राजभाषा के बीच का अंतर आसानी से समझ आ गया होगा तो चलिए अब भारतीय संविधान में भाषा के उल्लेख के बारे में जानते है।

भारतीय संविधान में राष्ट्रभाषा का उल्लेख

भारतीय संविधान के निर्माण के समय भारत की राष्ट्रभाषा का भी जिक्र किया गया था। उस समय डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ने संस्कृत भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने का सुझाव दिया था लेकिन चूकी उस समय संस्कृत भाषा के खिलाफ विरोध चल रहा था इस कारण संस्कृत को राष्ट्रभाषा नहीं बनाया गया।

बहुत से लोगो ने हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग की लेकिन इससे गैर हिंदी भाषी क्षेत्र के लोग इसका विरोध करने लगे और इस कारण हिंदी को भी राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया।

चूकी भारत विविधताओं वाला देश है और यहाँ पर अलग अलग भाषा और संस्कृति के लोग निवास करते है इसलिए यहाँ पर किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया है क्योकि अगर किसी भाषा को राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया जाये तो दूसरे क्षेत्र के लोग उस भाषा का विरोध करते है और इसी कारण संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ शामिल की गयी है।

संविधान के आंठवी अनुसूची में शामिल 22 भाषाएँ

भारत के संविधान की आंठवी अनुसूची में कुछ अधिकारिक भाषाओ का जिक्र किया गया है जिसका इस्तेमाल विभिन राज्य अपने हिसाब से राज काज के कामो में कर सकते है। संविधान के निर्माण के समय केवल 14 भाषाओ को ही शामिल किया गया था।

लेकिन बाद में बहुत से परिवर्तन हुए और नयी नयी भाषाएँ जुड़ती रही और इस प्रकार वर्तमान में भारत के संविधान की आंठवी अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ शामिल है तो चलिए जानते है वह 22 भाषाएँ कौन-कौन सी है।

हिन्दी भाषा मलयालम भाषा
असमिया भाषाकोंकणी भाषा
तमिल भाषाकन्नड़ भाषा
डोगरी भाषानेपाली भाषा
गुजराती भाषाबोड़ो भाषा
कश्मीरी भाषापंजाबी भाषा
उर्दू भाषामराठी भाषा
ओड़िआ भाषाबंगाली भाषा
मणिपुरी भाषामैथिली भाषा
संस्कृत भाषासंथाली भाषा
सिन्धी भाषा तेलुगू भाषा
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाएँ

इस सभी भाषाओ को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है और इन्हे आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है यानि की केंद्र या राज्य सरकार इन भाषा में से किसी भी भाषा का इस्तेमाल अपने सरकारी काम काजो में कर सकते है।

आशा करते है आपको हमारी यह पोस्ट जरूर पसंद आयी होगी और हमारी शेयर की गयी जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित हुई होगी।

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